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सशक्त अभिनय

August 20, 2017 drhcpathak 0

दिलीप कुमार की पुरानी और अच्छी फिल्मों में ‘दीदार’ को लोग अभी भुला नहीं पाए हैं, जिसमें उन्होंने एकअंधे गायक का किरदार निभाया था। ‘शोले’ […]

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अपंगता :

July 31, 2017 drhcpathak 0

देह की अपंगता को चुनौती के रूप में स्वीकार करने वाले कई कर्मठ यह प्रमाणित कर चुके हैं कि जहां मुर्गा नहीं होता, वहां का […]

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अशक्त

July 18, 2017 drhcpathak 0

विधाता की स्रष्टि में देह प्रारब्ध से प्राप्त होती है, अतः पंचभौतिक देह की विकृतियां कर्म फलानुसार मानी जाती हैं। कर्मफल का विधान देह की पूर्व […]

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कहानी एवं सिनेमा

June 18, 2017 drhcpathak 0

कहानी में आस्वादन के दो पक्ष होते हैं – लेखक एवं पाठक अथवा वक्ता तथा श्रोता, जब कि सिनेमा मेंतीन पक्ष – लेखक, दर्शक व […]

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प्रेमचंद

June 4, 2017 drhcpathak 0

हिंदी कथासाहित्यकारों में प्रेमचंद की रचनाओं पर सबसे ज्यादा फिल्में बनीं, क्योंकि अपनी रचनाओं में उन्होंने केवल देश की आजादी की आकांक्षा ही अभिव्यक्त नहीं […]

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साहित्य व सिनेमा :

May 21, 2017 drhcpathak 0

मनोरंजन एवं ज्ञानवर्धन के नाम पर आज के आम आदमी को विभिन्न श्रव्य दृश्य माध्यमों ने इस प्रकार घेर लिया है कि उसे पुस्तकें या […]

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संभावना :

May 8, 2017 drhcpathak 0

अनेक फिल्मी किरदारों में अपनी अस्मिता की तलाश करती नायिकाओं की विभिन्न भावनाओं को अभिव्यंजित करने के साथ साथ आज की अभिनेत्रियां फिल्म निर्माण और […]

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विद्रोह :

May 1, 2017 drhcpathak 0

1985 में ‘मिर्च मसाला’ की नायिका गांव के ऐयाश सूबेदार के विरूद्ध भी औरतों को संगठित करती है। 1987 में ‘प्रतिघात’ की नायिका अपने पति […]

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समस्या :

April 24, 2017 drhcpathak 0

1959 में ‘सुजाता’ में बड़ी जाति के परिवार द्वारा गोद ली गई छोटी जाति की लड़की की विवशता दिखाई देती है। 1960 में ‘मुगल ए […]

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स्वतंत्रता

April 17, 2017 drhcpathak 0

1941 से 1947 तक जंगल की लड़की, जंगल प्रिंसेज, जंगल गॉडेस, सरकस की सुंदरी, सरोवर की सुंदरी, लेडी रॉबिनहुड, खंजरवाली, बंदूकवाली, हिम्मतवाली, सिल्वर क्वीन, स्पीड […]

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